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प्रयाग हॉस्पिटल ने एक हाई-रिस्क ट्रॉमा सर्जरी कर बुरी तरह सड़क दुर्घटना में जख्मी 74 वर्षीय मरीज की जान बचाई

नई दिल्ली, 23/06/2026: प्रयाग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के डॉक्टरों ने समय पर सर्जरी, अत्याधुनिक आईसीयू की सुविधा और संबंधित विभागों के काम में आपसी तालमेल से 74 वर्षीय मरीज की जान बचाई। यह पेट की बहुत गंभीर इमरजेंसी और जानलेवा मामला था, जिसका सफलतापूर्वक निदान किया गया।

मरीज श्री रामशरण लाल को दिल की बीमारी, डायबिटीज और हाइपोथायरायडिज्म था। उन्हें 15 मई, 2026 को बहुत गंभीर हालत में आयुष्मान पैनल में प्रयाग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। पेट में तेज दर्द और सूजन, बार-बार उल्टी, बुखार की शिकायत थी और वह आघात में था। ये सभी लक्षण सिस्टैमिक इन्फेक्शन से जुड़ी पेट की गंभीर इमरजेंसी की ओर इशारा कर रहे थे।

मरीज को तुरंत इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती किया गया। एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने तुरंत मरीज का रिससिटेशन और स्टेबिलाइजेशन शुरू किया। उम्र अधिक होने और कई अन्य बीमारियां होने की वजह से मरीज को बहुत अधिक रिस्क की कैटेगरी में रखा गया। डॉक्टरों ने अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए उनके दिल की स्थिति को सही किया और डायबिटीज पर नियंत्रण बनाया और सर्जरी से पहले उनकी हालत सुधारने के लिए खून चढ़ाया।

मरीज की जान बचाने के लिए 16 मई, 2026 को डॉ. वी. एस. सोलंकी ने इमरजेंसी सर्जरी की। इस दौरान डॉक्टरों को छोटी आंत में गैंग्रीन होने का पता चला, जिसमें खून का जाना कम हो गया था और वह काम नहीं कर रही थी। जख्मी हिस्से को सफलतापूर्वक काटकर हटा दिया गया। इसके बाद स्वस्थ आंत के हिस्सों को फिर से जोड़ा गया। पेट की कैविटी से भारी मात्रा में पस और संक्रमित तरल निकाला गया। साथ ही हर्नियल डिफेक्ट का भी उपचार किया गया।

जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद मरीज ने इलाज का पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया और सर्जरी के बाद आईसीयू एवं वार्ड में उसकी पूरी देखभाल की गई। क्लिनिकली वह रिकवर करने लगा और उसकी स्थिति स्टेबल और संतोषजनक देखकर 19 मई, 2026 को डिस्चार्ज कर दिया गया।

समय पर इलाज, एक्सपर्ट सर्जन और समर्पित टीम की देखभाल में श्री रामशरण लाल को नया जीवन मिलने पर भावुक मरीज और उनके बेटे श्री राजन श्रीवास्तव ने डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और हॉस्पिटल मैनेजमेंट सभी का आभार व्यक्त किया।

डॉ. वी. एस. सोलंकी, सीनियर सर्जन, प्रयाग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने बताया, “मरीज की हालत बहुत गंभीर थी। उसे कई बीमारियां थीं। वह पेट के गंभीर संक्रमण के साथ ‘शॉक’ में अस्पताल आया था। हमने ऐन वक्त पर सर्जरी, क्रिटिकल केयर और टीमवर्क से बड़ी सफलता पाई। प्रयाग हॉस्पिटल अधिक रिस्क वाले इमरजेंसी मामलों में भी तत्परता से काम करने और बेहतरीन देखभाल करने में सक्षम है।”

प्रयाग हॉस्पिटल का परिचय

प्रयाग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने बतौर प्रयाग ऑर्थोपेडिक सेंटर 1995 में कार्यारंभ किया। डॉ. बी. पी. सिंह ने नोएडा सेक्टर 29 में एक विशेष क्लिनिक के रूप में इसकी शुरुआत की थी। अस्पताल का सिद्धांत है – “सेवा परमो धर्म” अर्थात सेवा सबसे बड़ा धर्म है। यह सहानुभूति, नैतिकता और मरीजों को प्राथमिकता देता है।

आज प्रयाग हॉस्पिटल 120 बेड का विशाल अस्पताल है। यह एनएबीएच और एनएबीएल से मान्यता प्राप्त है। अस्पताल में अत्याधुनिक उपचार की सभी बुनियादी सुविधाएं हैं और अनुभवी डॉक्टर, नर्स और अन्य प्रोफेशनल समर्पण भाव से काम करते हैं। यहां जनरल मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, इमरजेंसी केयर, मैटर्नल और चाइल्ड हेल्थ और स्पेशल ट्रीटमेंट आदि सभी सेवाएं उपलब्ध हैं।

प्रयाग अस्पताल ने गुजरते वर्षों के साथ अच्छी स्वास्थ्य सेवा, सेवा में नैतिकता, उपचार की सुलभता और मरीजों के लिए समर्पित सेवा से सबका भरोसा जीता है। यह कई सरकारी हेल्थकेयर स्कीम का हिस्सा है और इसके लिए योग्य परिवारों को सस्ता और सुलभ सेवा सुनिश्चित करने के लिए कई टीपीए पैनल से मान्यता प्राप्त है।

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