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डेंगू की वैक्सीन से जिले की तस्वीर बदलेगी

गुरुग्राम: हर साल मानसून शुरू होते ही गुरुग्राम में डेंगू का खतरा बढ़ने लगता है। सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल से लेकर शहर के निजी अस्पतालों तक बुखार और प्लेटलेट्स कम होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में देश की पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी मिलने से गुरुग्राम के लोगों के लिए भी राहत की उम्मीद जगी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वैक्सीन आने वाले समय में आम लोगों के लिए उपलब्ध होती है, तो डेंगू के कारण अस्पतालों पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है। खासतौर पर गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में, जहां बड़ी आबादी अपार्टमेंट और घनी बस्तियों में रहती है, वहां डेंगू नियंत्रण के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

डॉ. विकास वशिष्ट, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, सिल्वर स्ट्रीक मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने बताया, “भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन को मंजूरी मिलना देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डेंगू लंबे समय से देश में सबसे बड़ी मौसमी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक रहा है, जिससे हर वर्ष लाखों लोग प्रभावित होते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी काफी दबाव पड़ता है। यह वैक्सीन डेंगू की रोकथाम के लिए एक प्रभावी साधन साबित हो सकती है, लेकिन इसे अकेले समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना, साफ-सफाई बनाए रखना, समय पर जांच, शीघ्र उपचार और जनजागरूकता जैसे उपाय पहले की तरह ही बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “हम इस वैज्ञानिक उपलब्धि का स्वागत करते हैं और देश में रोगों की रोकथाम को मजबूत बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हैं। यदि इस वैक्सीन को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और आमजन भी जागरूक होकर इसमें भागीदारी निभाएं, तो यह भारत की डेंगू के खिलाफ लड़ाई को नई मजबूती देगा और भविष्य में डेंगू के मामलों के साथ-साथ इससे होने वाली गंभीर जटिलताओं और मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”

एक दिन में 173 संदिग्धों के नमूने लिए

मानसून के बीच गुरुग्राम में डेंगू और मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। राहत की बात यह है कि जिले में मंगलवार को डेंगू का कोई नया मामला सामने नहीं आया।

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, जिले में अब तक डेंगू के कुल पांच मामलों की पुष्टि हुई है। कोई नया मामला दर्ज नहीं किया गया, जबकि मलेरिया के तीन मामले दर्ज किए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। मंगलवार को रैपिड फीवर सर्वे टीमों ने 11,429 घरों का दौरा किया। इसके साथ ही इस वर्ष अब तक कुल 7,08,468 घरों को सर्वे के दायरे में लाया जा चुका है।

विभाग के अनुसार, मंगलवार को डेंगू की जांच के लिए 173 नमूने एकत्र किए गए। इस वर्ष अब तक कुल 3,146 लोगों के नमूनों की जांच की जा चुकी है।

हालांकि, मंगलवार को किसी भी नए डेंगू मरीज की पुष्टि नहीं हुई, जिससे विभाग ने राहत की सांस ली है। वहीं, मलेरिया की रोकथाम के लिए भी अभियान जारी है। एक दिन में 811 ब्लड स्लाइड तैयार की गई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 1,59,329 ब्लड स्लाइड की जांच की जा चुकी है। मंगलवार को मलेरिया का भी कोई नया मामला सामने नहीं आया।

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